संकेत साहित्य समिति बिलासपुर इकाई द्वारा राजकिशोर नगर में पावस ऋतु एवं आज़ादी की 76वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में कोरबा से पधारे शायर इकबाल अहमद 'अंजान'के मुख्य आतिथ्य एवं वरिष्ठ कवि राज कुमार द्विवेदी 'बिंब' की अध्यक्षता में सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया । इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि के रूप में उपस्थित रहे हिंदी बंगला तथ अंग्रेजी भाषा के सिद्धहस्त कवि डॉ.गोपाल चंद्र मुखर्जी और उर्जाधानी से आये कवि रामचंद्र राव एवंकविता जैन। कार्यक्रम का सफल संचालन संकेत साहित्य समिति बिलासपुर इकाई के अध्यक्ष राकेश खरे 'राकेश' ने किया। उन्होंने संकेत साहित्य समिति द्वारा पिछले चार दशकों से साहित्य के उन्नयन एवं विकास हेतु किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से प्रकाश डाला। गोष्ठी में उपस्थित रचनाकारों ने विविध विषयों पर अपनी रोचक रचनाएं प्रस्तुत कीं। बानगी के तौर पर -
• दोहा ग़ज़लों से कहें,ग़ज़लों की कुछ बात। कविता मुक्तक धूप में,करें मधुर बरसात। -राज कुमार द्विवेदी "बिंब"
• अपनी सूरत भी पराई लगती है ये जिंदगी भी किसी की चुराई लगती है -इकबाल अहमद अंजान
• हजारों सीपियां टूटे तो एक मोती निकलता है बड़ी मुश्किल से अपनों मे कोई अपना निकलता है - एम आर राव
• जलाती जेठ की गर्मी ,धारा सीना फटा ऐसा , हुई गलियां सड़क सूनी , दुखद यह दृश्य था कैसा। सरोवर धूप में सूखे , नदी कृशकाय सी रोती बरस जाए घटा बूंदे ,भरे झोली सभी मोती - कविता जैन
• भावना से बड़ा भगवान नहीं हो सकता ,देवताकी तरह पूजे तो बहुत गए हैं आदमी, हर आदमी इंसान नहीं हो सकता -नरेंद्र कुमार शुक्ल 'श्रकिल'
•अपनो के लिए तो सब जीते हैं ,गैरों के लिए वह जीती , अमृत का घट औरों को देकर, विष का प्याला वह पीती - वंदना खरे
• राकेश खरे 'राकेश' ने वर्षा ऋतु एवं आज़ादी के महत्व पर एवं डा गोपाल चंद्र मुखर्जी ने आदिवासियों पर आधारित अपनी प्रसिद्ध बंगला कविता ' बोझों न अमार यंत्रणा ' प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मुरलीधर गोंडावे सहित अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाएँ प्रस्तुत की। अंत मे अतिथियों एवं कवियों के प्रति नेहा खरे ने आभार प्रदर्शन किया।
समिति के संस्थापक एवं प्रांतीय अध्यक्ष डॉ.माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग 'ने अभिनव आयोजन के लिए बिलासपुर इकाई के पदाधिकारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की ।
Ghanshyam Prasad Sahu
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