(१)
मातृभूमि रखवाला फौजी, मैं हूँ भारत मॉं की ढाल।
परखच्चे दुश्मन के बिखरे, कालों के भी मैं हूँ काल।।
डर-डर झॉंके थर-थर कॉंपे, देख झलक सुन कर हुंकार।
आग लगा दूँ छल -छल सागर, बैरी भागे सुन ललकार।।
(२)
उच्च शिखर पर दहाड़ दौड़ूँ , फहरे तिरंगा दुनिया मौन।
सौ सौ मार गिरा दूँ दुश्मन, किसकी हिम्मत घेरे कौन।।
बुरा देख दे आँखें फोड़ूँ, हूँ रखवाला खॉंटी वीर।
मेरे मन भारत मॉं बसती, दिखला दूँ क्या छाती चीर।।
(३)
नित सागर पर रखता नजरें, उत्तर डटा हिमालय पार।
आसमान से धरती नापूँ, शीश कटाने झट तैयार।।
प्यारे हिन्द देश के वासी, तुम भी तो हो इसके लाल।
भारत मॉं पर ऑंख उठा दे, तुरत उधेड़ो उसकी खाल।।
डॉ.अशोक 'आकाश' ✒️
Ghanshyam Prasad Sahu
+91-79872 78335
chhattisgarhsandeshnews@gmail.com
© Chhattisgarh Sandesh. All Rights Reserved. Developed by TechnoDeva