June 09, 2023   gpsahu



लघु कथा : सुख की नींद

        एक बार सेठ गणपत राय अपने गुरु के पास गया और कहा गुरुजी मैं बहुत परेशान हूं, मुझे नींद नहीं आती है। कृपया आप कुछ उपाय बताएं?"
          गुरुजी ने कहा,"जो अपने भाई का हक मारा होता है उसे नींद नहीं आती, चोर को नींद नहीं आती, कर्जदार को नींद नहीं आती, व्यभिचारी को नींद नहीं आती एवं चिंता से नींद नहीं आती। बताइए इसमें से कौन सा कारण है तुम्हारे पास जिससे नींद नहीं आती?"
          सेठ गणपत राय ने हाथ जोड़कर कहा," गुरु जी इसमें से एक भी अवगुण मेरे पास नहीं है परंतु मुझे पता नहीं चलता कि क्यों नींद नहीं आती है?"
          गुरुजी ने कहा, "कितनी उम्र है तुम्हारी?"
        "मेरी उम्र 70 वर्ष की है गुरुजी।"
         घर की सियानी अर्थात आय -व्यय का लेखा -जोखा कौन करता है?"
          "मैं ही करता हूं गुरु जी ।"
         "कहीं चाबी का गुच्छा कमर पर लटकाए घूमते तो नहीं हो?"
           गणपत राय ने चाबी का गुच्छा दिखाते हुए कहा, "हां गुरुजी! मैं अपने कमर में चाबी का गुच्छा रखा हूं ।"
              गुरुजी ने कहा, "बस, बस बेटा बीमारी की जड़ मैंने पकड़ लिया। चाबी का गुच्छा ही नींद नहीं आने देती। इसे अपने योग्य बेटे को सौंप दो। नींद आराम से आयेगी। फिर सुख की नींद सोवोगे।   
         गणपत राय ने गुरुजी की बात मानी और अपने योग्य बेटे को चाबी सौंप दी और सुख की नींद सोया।

चाह गई चिंता मिटी, मनवा बेपरवाह ।
जिसको कुछ नहीं चाहिए, सोई सहनशाह।

         
दिनेंद्र दास
कबीर आश्रम करहीभदर
अध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद् तहसील इकाई बालोद,
 जिला- बालोद छग
मो. 85648 86665

Advertisement







Trending News

संपादकीय

Get In Touch

Ghanshyam Prasad Sahu

+91-79872 78335

chhattisgarhsandeshnews@gmail.com

© Chhattisgarh Sandesh. All Rights Reserved. Developed by TechnoDeva