-जइसे जइसे कोनो चुनाव लकठाथे तहाँ ले कथावाचक मन के पंडाल सजे लगथे जी भैरा.
-सिरतोन आय जी कोंदा.. अब देखना हमरे शहर म के ठन पंडाल एके संग सजे हावय तेला.
-का बताबे संगी.. अउ हमर इहाँ के सियानीन ह सबोच पंडाल म लादिक-पोटा चपकाय बर जाहूं कहिके सधाय रहिथे.
-हमरो घर के इही हाल जी.. देखबे त घर के तीर म कतेक सुघ्घर सुघ्घर देवी देवता मन के मंदिर देवाला हे, तिहां झॉंके बर तक नइ जाय, अउ ए लादिक-पोटा म धक्का खाय बर लुकलुकावत रहिथे.
-फेर कुछू होवत संगी.. अइसन ल भक्ति के उज्जर रूप नइ कहे जा सकय.
-अरे भक्ति कहाँ ए तो भेड़िया धसान बरोबर जनाथे. तभे तो एक पंडाल म इनला 'रायपुर के पागलों ताली बजा दो' कहिके संबोधित घलो कर दिए जाथे.
-लोगन के बइहा-भुतहा बरोबर चरित्तर देख के तो अइसनेच कहे जा सकथे संगी
Ghanshyam Prasad Sahu
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