कोलंबो। श्रीलंका (sri lanka) में महिन्द्रा राजपक्षे द्वारा प्रधानमंत्री बनने के बाद लोकतांत्रिक संस्थाओं को खत्म करना भारी पड़ गया। देश की आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद हालात बेकाबू हो गये। अंतत: महिन्द्रा राजपक्षे को 9 मई 2022 को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद लगातार बिगड़ रहे हालात पर काबू पाने के लिए कफ्र्यू लगाया गया। फिर भी स्थिति बिगड़ती ही जा रही है।
भारत में पॉलिटिकल स्ट्रेटेजिक माने जाने वाले प्रशांत किशोर ने श्रीलंका के हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि श्रीलंका के सबसे ताकतवर नेता और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे अपनी सत्ता को स्थायी मान रहे थे। 2050 तक हुक़ूमत करने का दम भरते थे। सारी लोकतांत्रिक संस्थाओं को खत्म और बेअसर कर चुके थे। अब इस्तीफा दे चुके हैं। कफ्र्यू के बावजूद उनका महल जला दिया गया है।
सांसदों और मंत्रियों को पकड़ पकड़कर कूटा जा रहा है। एक सांसद तो डरकर खुद ही खुदकुशी कर बैठा है। सेना तक नहीं बचा पा रही है। हालात ये हैं कि अब कोई कार्यवाहक प्रधानमंत्री तक बनने को तैयार नहीं हो रहा है।
श्रीलंका में लगातार बिगड़ रहे हालात को देखते हुए सेना ने कफ्र्यू को 12 मई 2022 की सुबह सात बजे तक बढ़ा दिया है। यहां प्रदर्शनकारी सत्तारुढ़ दल के नेताओं के घरों के साथ ही सार्वजनिक सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे है। इस पर काबू पाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने तीनों सेनाओं को सतर्क कर दिया है।
Ghanshyam Prasad Sahu
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