रायपुर.गौतम अडाणी के कारण एक बार फिर से छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी परेशानी में पड़ती नजर आ रही है।स्मार्ट मीटर का एक फेस का 16 साै करोड़ का टेंडर एक बार फिर से रद्द होने की स्थिति में पहुंच गया है। समार्ट मीटर की चार हजार कराेड़ की योजना से अडाणी की कंपनी एक बार के टेंडर में पूरी तरह से बाहर हाे चुकी है, लेकिन एक टेंडर फिर से किए जाने के बाद आकर मामला फिर से अडाणी पर अटक गया है। दुर्ग-बस्तर संभाग के साथ पावर कंपनी के राजनांदगांव संभाग को मिलाकर जो एक ग्रुप बनाया गया है, उसका री-टेंडर किया गया है। इसमें एकमात्र अडाणी की कंपनी की निविदा के कारण दो बार तिथि बढ़ाई गई, लेकिन इसके बाद भी कोई दूसरी कंपनी अब तक नहीं आई है। ऐसे में पॉवर कंपनी अब विचार कर रही है कि इस मामले में केंद्र सरकार को जानकारी देकर दिशा निर्देश मांगा जाएगा।
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों
में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना बनाई है। इसके लिए केंद्रीय विद्युत
प्राधिकरण को नियम बनाने का काम सौंपा गया है। प्राधिकरण ने तय किया है कि
हर वर्ग के उपभोक्ताओं के मीटर बदले जाएंगे और सारे मीटर पोस्टपेड से बदलकर
प्रीपेड हो जाएंगे। ऐसे में राज्य के 20 लाख बीपीएल वर्ग के उपभोक्ताओं के
भी मीटर बदले जाएंगे, जबकि इसकी खपत सौ यूनिट से ज्यादा नहीं होती है।
प्रदेश सरकार ने इनके मीटर न बदलने का आग्रह केंद्र सरकार से किया था,
लेकिन इसको नहीं माना गया।
16 साै करोड़ के टेंडर में पेंच
पॉवर कंपनी ने चार हजार करोड़ का काम होने के कारण तीन हिस्सों में टेंडर किया था। रायपुर संभाग बड़ा होने के कारण उसे अलग संभाग रखा गया और इसका टेंडर 16 सौ करोड़ का किया गया। इसका काम टाटा को मिल गया है। इसके बाद दुर्ग संभाग के साथ बस्तर संभाग और पॉवर कंपनी के राजनांदगांव संभाग को मिलाया गया। इसका टेंडर भी 16 सौ करोड़ का किया गया था। इसमें रेट बीड एकमात्र अडाणी की होने के कारण इसका टेंडर रद्द कर दिया गया। इसका री-टेंडर किया गया, लेकिन इस बार भी इसमें अडाणी के अलावा किसी दूसरी कंपनी ने रुचि नहीं दिखाई है। तय तिथि 10 मई तक महज अडाणी की ही निविदा होने के कारण पहले इसकी तिथि 25 मई की गई, लेकिन इसके बाद भी और कोई निविदा नहीं आने पर फिर से इसकी तिथि बढ़ाकर 9 जून की गई, लेकिन अब भी कोई और कंपनी नहीं आई है।
केंद्र सरकार से पूछेंगे क्या करें
पावर कंपनी
के अधिकारियों का कहना है इस मामले में पहले तो केंद्र सरकार की गाइड लाइन
का अवलोकन करेंगे कि क्या किया जा सकता है। अगर नियमों को शिथिल करके टेंडर
करने का प्रावधान होगा तो फिर से री-टेंडर करेंगे, या तिथि बढ़ाएंगे, ऐसा
संभव नहीं हुआ तो केंद्र सरकार से दिशा निर्देश लेकर काम किया जाएगा। अगर
संभव होगा तो केंद्र सरकार की एजेंसी ईईएसएल को भी काम दिया जा सकता है,
क्योंकि यह कंपनी कई राज्यों में काम कर रही है।
Ghanshyam Prasad Sahu
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