111 साल पुरानी वह घटना
तो आइए आपको बताते हैं वह पूरी घटना जिसने रहस्य और रोमांच की दुनिया को
जन्म दिया। टाइटैनिक फिल्म तो आपने देखी ही होगी। न भी देखी हो तो नाम तो
सुना ही होगा। यह फिल्म बनी करीब 111 साल पुरानी एक सच्ची घटना पर।
टाइटैनिक नाम एक जहाज हजारों लोगों को लेकर समुद्री यात्रा पर निकला था।
उत्तरी अटलांटिक महासागर की सतह पर तैरता हुआ यह जहाज एक 15 अप्रैल 1912 एक
बर्फ की चट्टान से टकराया और डूब गया। जहाज में सवार लोगों को बचाने की
कोशिशें हुईं, लेकिन इसके बावजूद 1500 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे। इस
हादसे को लोग करीब-करीब भूल ही चुके थे कि 1985 में कनाडा के पास एक द्वीप,
जिसका नाम है न्यूफाउंडलैंड, उसके करीब ही टाइटैनिक का मलबा मिलने की खबर
आई।
ऐसे शुरू हुआ था टाइटैनिक टूरिज्म
टाइटैनिक का मलबा मिला समुद्र की सतह से 13 हजार फीट नीचे। टाइटैनिक के
डूबने की घटना एक बार फिर से ताजा हो उठी। जिसने भी मलबे के बारे में सुना
रोमांच से भर उठा। फिर क्या था, एक कंपनी के दिमाग में आइडिया आया-क्यों न
लोगों को टाइटैनिक के मलबे की सैर कराई जाए। बस यहीं से ओशनगेट नाम की
कंपनी ने टाइटैनिक टूरिज्म की नींव डाल दी। यह यात्रा जोखिम से भरी तो थी
ही, साथ ही इसमें जेब भी इस कदर ढीली होती है कि आम इंसान तो इस टूर पर
जाने की कल्पना भी नहीं कर सकते। लेकिन पैसे वाले लोगों के शौक भी तो इतर
होते हैं। ऐसे में अरबपतियों ने टाइटैनिक के मलबे का टूर करना शुरू कर
दिया। ताजा घटना में मारे गए लोगों में तीन लोग अरबपति ही थे। पाकिस्तान के
शहजादा दाऊद, उनके बेटे सुलेमान और ब्रिटिश अरबपति हैमिश हार्डिंग। इसके
अलावा दो अन्य शख्स में एक खुद ओशनगेट कंपनी के सीईओ स्टॉकटन रश और
पनडुब्बी चालक पॉल हेनरी थे।
दो करोड़ है टिकट का दाम
अब सवाल उठता है कि आखिर टाइटैनिक की इस रोमांचकारी लेकिन जोखिम से भरी
यात्रा का खर्च कितना है? इस टूर को कराने वाली ओशनगेट एक टिकट के लिए दो
करोड़ रुपए की कीमत वसूल करती है। यह यात्रा आठ दिन और सात रात तक चलती है
और इसकी शुरुआत होती है कनाडा के सेंट जॉन न्यूफाउंडलैंड नाम की जगह से।
चूंकि यात्रा काफी खतरनाक है और लोगों के अंदर डर भी होता है, इसलिए यात्रा
के लिए टिकट बुक करवा चुके लोगों को कंपनी एक महीने पहले से ही ट्रेनिंग
देना शुरू कर देती है। इस टूर पर जाने के लिए ओशनगेट की वेबसाइट से टिकट
बुक होता है। हालांकि सभी लोग टिकट बुक नहीं करा सकते हैं। टिकट के लिए कुछ
नियम और शर्तें हैं और उन्हें पूरा करना अनिवार्य है। पहले तो उम्र 18 साल
से अधिक होनी चाहिए।
फिटनेस पैमानों पर खरा उतरना जरूरी
इसके अलावा फिटनेस के कुछ पैमाने भी हैं, जिन पर खरा उतरना जरूरी है। इसमें
सबसे अहम है पनडुब्बी के अंदर रहने की क्षमता। पानी के अंदर किसी भी तरह
की परेशानी आने पर उससे निपटने में सक्षम होना और 6 फीट की सीढ़ी पर तेजी
से चढ़ने-उतरने की क्षमता भी होनी जरूरी है। टाइटैनिक के मलबा देखने के लिए
एक बार में सबमरीन में पांच लोग सवार होते हैं। इसके बाद यह समुद्र में 19
हजार फीट की गहराई तक लोगों को ले जाती है। सबमरीन में पिछले हिस्से में
ऑक्सीजन टैंक होते हैं। यह टैंक 96 घंटे तक ऑक्सीजन सप्लाई दे सकते हैं।
पनडुब्बी में एक खिड़की भी बनी होती है जिससे इसमें सवार लोग बाहर देख सकते
हैं। दावे के मुताबिक अभी तक कभी पनडुब्बी डूबने की घटना नहीं हुई थी,
लेकिन इस बार वह अनहोनी हो ही गई।
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