September 12, 2023   harshad



कारोबार के लिए हमारे मुस्लिम भाई भी भारत के साथ; मिडल ईस्ट कॉरिडोर से टेंशन में पाकिस्तान

इस्लामाबाद. भारत में आयोजित जी-20 समिट की दुनिया भर में चर्चाएं रही हैं। इस समिट में इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर पर सहमति बनी, जिसकी सबसे चर्चा हो रही है। यहां तक कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भी इससे परेशान है। पाकिस्तान के सबसे बड़े अखबार कहे जाने वाले 'डॉन' ने अपने संपादकीय में सऊदी अरब पर भड़ास निकाली है। अखबार ने लिखा है कि बदलती दुनिया में आर्थिक मामले नैतिकता पर भारी पड़ रहे हैं। यहां तक कि हमारे मुस्लिम भाई भी कारोबार के लिए भारत के साथ हो गए हैं। उसका इशारा सीधे तौर पर सऊदी अरब की ओर था।

अखबार ने लिखा, 'पाकिस्तान को यह समझा होगा कि कश्मीर में भारत की ओर से मानवाधिकारों के उल्लंघन के बाद भी पश्चिमी देशों के साथ ही हमारे मुस्लिम भाई भी उसके साथ कारोबार कर रहे हैं। उन्हें कश्मीर में हो रहे अत्याचारों की कोई चिंता नहीं है। दुखद सच्चाई यह है कि वैश्विक मामलों में नैतिकता बाजार के आगे दब गई है।' अखबार लिखता है कि यदि हमें ग्लोबल ट्रेड नेटवर्क में शामिल होना है और हम चाहते हैं कि दुनिया हमारी आवाज को सुने तो फिर पहले हमें अपने आंतरिक मामले हल करने होंगे। खुद को आर्थिक तौर पर मजबूत करना होगा।

पाकिस्तानी मीडिया ने लिखा कि यह जो कॉरिडोर बनाने का फैसला हुआ है, यह पुराना मसाला मार्ग ही है। अमेरिकी, यूरोप और भारत मिलकर इस रूट के जरिए चीन वन बेल्ट ऐंड वन रोड को जवाब देना चाहते हैं। इसके अलावा अखबार लिखता है कि यह इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि पश्चिमी देशों को एशिया में एंट्री की जरूरत है। इसके अलावा ग्लोबल साउथ के उभरने की वजह से भी ऐसी डील हुई हैं। यही नहीं अफ्रीकन यूनियन की एंट्री को भी पाकिस्तान ने ब्रिक्स और एससीओ जैसे संगठनों के विस्तार की देन बताया है।

कहा- हम तो चीन के बनाए CPEC का भी नहीं ले पाए फायदा

पाकिस्तान ने कहा कि इन देशों ने साबित किया है कि एशिया और यहां तक कि अफ्रीका के देश भी अब एक शक्ति हैं। ऐसी स्थिति में पश्चिमी देश अब अपने क्षेत्र से निकलकर एशिया के देशों को भी तरजीह दे रहे हैं। इसका फायदा भारत को मिल रहा है, लेकिन पाकिस्तान किसी भी नेटवर्क का हिस्सा नहीं है। यही नहीं अखबार लिखता है कि हम तो चीन के द्वारा बनाए गए चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर का भी लाभ नहीं उठा पा रहे हैं क्योंकि हम आंतरिक राजनीति में उलझे हैं और कारोबारी मसले पर बेहद पीछे हैं।

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