July 16, 2023   gpsahu



छत्तीसगढ़ के पहली तिहार हरेली



सावन म सबो कोती हरियाली के हे बहार।

चलव मनाबो छत्तीसगढ़ के पहली तिहार।।


किसान ह धान बों डरिस खेत अउ भांठा।

नांगर, कुदरी, रापा ल धोके पारही हांथा।।


रचमच-रचमच गेंड़ी चढ़हे लईका मन आहीं।

मुसुर-मुसुर गुड़हा चीला ल जम्मों झन खाहीं।।


पाखा म सवनाही बनाथें सबो माई लोगिन।

घर के बाहिर म बनाहीं गोबर के परेतीन।। 


यादव ह घरो-घर नीम के डारा ल खोंचही।

लोहार ह चौखट म लंबा खीला ल ठोंकही।।


जुरमिल के कुटकी देबी के पूजा ल करबो।

मवेशी के बचईया देवता गोरइंया ल मनाबो।।


कबड्डी अउ नरियर फेंकउला के खेलबो खेल।

गेंड़ी दउड़ अउ नाचा ले संगी संग होही मेल।।


कवि- अशोक कुमार यादव मुंगेली, छत्तीसगढ़

जिलाध्यक्ष राष्ट्रीय कवि संगम इकाई।


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