काफी दिनों से बुधियारीन को लोग बुलाते, खासकर डिलीवरी के समय। वे दाई का काम करती थी। किसी के यहां बच्चा आने का समय होता तो सर्वप्रथम मुख पर बुधयारीन का नाम आता। क्योंकि वह डिलीवरी कराने में प्रवीण महिला थीं। परंतु गांव में उनसे दो -तीन महिलाएं ईर्ष्या रखती थीं और उसे नीचे गिराने का मौका खोजती थी। उसे वे लोग टोनही, चुड़ैल कहकर प्रचार करती थीं।
बुधियारीन के पति को इस संसार से पयान हुए कुछ वर्ष हो गये थे। पति के जाने के बाद तो और स्वतंत्र रूप से सामाजिक कार्यों में भाग लेती थी। महिला सामाजिक संगठन में उनकी कीर्ति चारों तरफ फैली थीं।
गांव में एक घर जन्म उत्सव मनाया जा रहा था। गांव की बहुत सी महिलाएं उनके घर आई हुई थीं। वहीं बुधयारीन भी गई थी। बच्चे की दादी बड़ी प्रसन्नता से अपने नाती को एक के बाद एक बारी - बारी से सभी महिलाओं की गोद में देती है। सभी महिलाएं अपनी गोदी में बच्चे को हिलाती, डुलाती और दूसरी महिला को देती। इसी बीच बुधियारीन की गोद में भी बच्चे को दिया गया। थोड़ी देर बाद बच्चे रोने लगा, फिर बच्चा चुप नहीं हुआ। अब तो उनकी विरोधी महिलाओं को मौका मिल गया। वे लोग कहने लगीं, "देख लिया ना ...! ये स्त्री पक्का टोनही है, चुड़ैल है; तभी तो इनकी गोद में जाते ही बच्चा रो रहा है।
गांव में पंचायत बैठी।बुधियारीन की विरोधी महिलाएं नई -नई घटनाएं गढ़गढ कर उसे गिराने का प्रयास कर रही थी, तभी बुधयारीन की सहेली मीना बोली, " ये लोग बुधियारीन पर फालतू लांछन लगा रही हैं। हकीकत में बात यह है जिसके घर जन्म उत्सव मनाया जा रहा है, उन्हीं के घर में मैं भी सेवा कार्य में लगी थी, हम दोनों को खलबट्टा में मिर्चा कूटने की सेवा मिली थी। काम पूरा होने के बाद हाथ धोकर बच्चे को हाथों में लिए थे। मेरे हाथों से भी बच्चा कुछ रोया और बुधियारीन के हाथों से बच्चा ज्यादा रोया; क्योंकि मैं अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोई थी। परंतु बुधियारीन केवल पानी से धो ली थी। मुझे तो हाथ अभी भी जल रहा है। बच्चे का रोने का कारण मिर्चा के तेज जलन के प्रभाव की वजह से है ना कि बुधियारीन के जादू टोना से।
कहानी का संदेश:
ईर्ष्यावश किसी को नीचे गिराने की दृष्टि से मंत्र- तंत्र, जादू- टोना किया है, ऐसा समझकर उसे सताते हैं, कष्ट देते हैं, उनके लिए मुकदमा करते हैं, इतना ही नहीं हत्या तक कर डालते हैं। जबकि मंत्र -तंत्र, जादू- टोना सब अंधविश्वास है और झूठ है।
कहानीकार
महंत दिनेंद्र दास
कबीर आश्रम करहीभदर
अध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद् तहसील इकाई बालोद
जिला- बालोद (छग)
मो. 85648 86665
Ghanshyam Prasad Sahu
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