सामाजिक संगठन विशेष उद्देश्यों की पूर्ति के लिए निर्मित किए जाते हैं। उसको बनाने से पूर्व समिति संबंधी कुछ नियम और कानून की जानकारी ली जानी चाहिए और उसको विधिवत पंजीयन करवाया जाना चाहिए। समिति पंजीयन हेतु सरकार ने एक विधान बनाया हुआ है। जिसे समिति पंजीयन विधान/ सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट कहा जाता है। यह छत्तीसगढ़ (मप्र) शासन समिति पंजीयन अधिनियम 1973 द्वारा पारित किया गया है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों का समूह किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए सामाजिक/ शैक्षणिक/ साहित्यिक/ सांस्कृतिक संस्था का निर्माण एवं पंजीयन करवा सकता है। समिति पंजीयन के लिए आजकल ऑनलाइन आवेदन पत्र और शुल्क जमा किया जाता है। पंजीयन होने के बाद सदस्यता अभियान चलाएं और अधिक से अधिक लोगों को संगठन से जोड़ें। फिर नियमानुसार कार्यकारिणी का चुनाव करवाएं फिर निम्नानुसार अनेक समितियों का गठन कर सबको उनकी रुचि एवं योग्यता के अनुसार जिम्मेदारी बांट दे।
प्रबंधकारिणी समिति: जो समिति का पंजीयन करवाए।समस्त दस्तावेज सुरक्षित रखे। यह मूल आधिकारिक समिति होगी। इसके अधीन कई छोटी छोटी उप समितियों का निर्माण किया जाता है! उप समिति गठन के लिए किसी दो या तीन पदाधिकारियों को अधिकृत कर सकते हैं! प्रबंधकारिणी समिति संस्था संबंधी समस्त कार्यवाही, उप समितियों की समस्त गतिविधियों एवं विधि निषेध के लिए उत्तरदायी होती है!
प्रचार एवं सदस्यता समिति: समिति के उद्देश्यों का प्रचार प्रसार करे। जन सम्पर्क करे और सदस्यता में वृद्धि करे!
कार्य योजना समिति: समिति के लिए वार्षिक कार्य योजना और बजट बनाए।
कार्यालय प्रबंधन/ ब्योरा संग्रहण समिति: कार्यालय की समुचित व्यवस्था एवं संस्था के समस्त पदाधिकारियों और कंप्यूटर के माध्यम से सदस्यों की सम्पूर्ण जानकारी को सुरक्षित व संरक्षित करे। संस्था की वेब साइट का नियमन, नियंत्रण व संचालन करे।
अर्थ प्रबंधन समिति: समिति के लिए आर्थिक सहयोग दान, चंदा आदि जुटाए!
शिक्षण प्रशिक्षण समिति: संस्था पदाधिकारियों एवं आम लोगों को शिक्षित और प्रशिक्षित करे।
भवन निर्माण समिति: संस्था के लिए आवश्यक भवन, प्रसाधन आदि का निर्माण कराए।
कार्यक्रम आयोजन समिति: वर्ष भर में होने वाले आयोजनों की सूची बनाए, कार्यक्रम की रूपरेखा तय करे और समिति पदाधिकारियों से अनुमोदन कराए, फिर तैयारी करे!
आपदा प्रबंधन/ सहायता समिति: सामाजिक व्यक्ति को आपत्तिकाल में तत्काल मानवीय/ पैसा अथवा सामग्री की सहायता पहुंचाए!
मीडिया संयोजन समिति: संस्था की कार्य योजना एवं कार्यक्रम संबंधी लिखित/ मौखिक वक्तव्य देना एवं प्रेस वार्ता आयोजित करना।
क्रय विक्रय समिति: स्थानीय खरीदारी करे। आवश्यक वस्तुओं का भंडारण करे। सामग्री की सुरक्षा करे। आय और व्यय का हिसाब रखे तथा यथा समय समिति के पटल पर रखे।
पर्यवेक्षण समिति: सभी समितियों के कार्यों की गुणवत्ता की जांच करे और समिति के पटल पर रखे।
समन्वय समिति: समिति के पदाधिकारियों के आपसी संबंधों को मधुर बनाने में सहयोग करे तथा अन्य संगठनों के साथ मिलकर काम करने हेतु समन्वय स्थापित करे।
समीक्षा एवं मार्गदर्शन समिति: संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा करे और उचित मार्गदर्शन करें! आगामी कार्य योजना पर दिशा निर्देश करे।
पं. घनश्याम प्रसाद साहू
संपादक छत्तीसगढ़ संदेश
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Ghanshyam Prasad Sahu
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