घर पर हूँ आज
देकर आया हूँ
नारी के सम्मान पर एक जोशीला सा भाषण
सीता, गार्गी, मैत्रेयी, मदालसा को
किया था मैंने याद
नारी की गरिमा को दुर्गा, काली, सरस्वती सम
बतलाया था मैंने
मेरे इन उदात्त विचारों ने
सभागार में बटोरी थी तालियाँ
मिली थी वाहवाही
दोपहर लौटा हूँ घर पर
पत्नी ने परोसी है, थाली मेरे सामने
मैंने डाली थाली पर एक नज़र
पारा मेरा चढ़ गया देखकर कटहल की सब्जी
मुझे लग रहा था अपमान कि मेरे पसंद की सब्जी है नदारद
कहा मैंने भला बुरा
तब समझ ने मुझे दिया यूँ ताना
क्या महिला दिवस पर भी
होगी हावी पति की ही पसंद
एक दिन के लिए तो हम
कर देते आज़ाद उसे अपनी पसंद नापसंद की
झंझटों से आओ आज मनाते हैं
अपने घर पर महिला दिवस
दो मीठे बोल बोलकर
'उसे' भी देकर एक
नया उन्मुक्त आकाश
सपनों पर पहरा
इन्दिरा पिल्लई तुम्हारे ज़ज्बे को करता हूँ सलाम
देखता हूँ मैं तुममे अपनी ही बिटिया को
चाहता हूँ, वह भी दिखाये बेबाकी
अपने सपनों को कहने और जीने की
आज़ादी क्यों नहीं देता, समाज
सधी-सधी सी रहने
नहीं उफ़्फ़ तक करने
सब चुपचाप सहन करने की ही सीख
देते आये हैं हम, अपनी बिटिया को
दरिंदगी वो नहीं, जो 'वो' करते हैं
दरिंदगी ये है कि हमने
बेटियों के सपनों पर भी लगा दी है बंदीशें
बिठा दिया है पहरा, ताज़ी हवाओं पर
काश ! मेरी भी बेटी होती
तुम सी उन्मुक्त हवाओं सी
ओढ़ के वसंती चादर समेट लेती
अपने हिस्से की खुशी
जंजीरों से जकड़ी दुनिया
कब होगी आज़ाद ?
कब होगी उसकी हंसी
बेरोक टोक
काश हमने खुद को आज़ाद किया होता
खुद की
नासमझी भरी समझ के आगोश से
(उन्मुक्त होकर अपना शादी-प्रोफ़ाइल अपलोड करने वाली बिटिया)
महिला दिवस
हम मनाते हैं सड़कों पर
गलियों, चौक चौराहे पर
नुक्कड़ों और बड़े-बड़े सभागारों में
राजपथ पर और कार्यालयों में
सुनते हैं कथाएँ
महिला दिवस पर
घर की महिलाओं को पता ही नहीं चलता
महिला दिवस का
न ही उस भाषण का
जो दे आए हैं श्रीमान
तालियों की गड़गड़ाहट के बीच
कोई भी दिवस
नहीं करता है
घर की महिलाओं की दिनचर्या में परिवर्तन
नहीं होती है उनकी चिंता
और न ही होता है उनका काम कम
आज सोच रहा हूँ कि
घर पर ही मना लूँ
इस बार महिला दिवस
डॉ. अजय आर्य
पिता का नाम : स्व. डॉ. शालिक राम मलेवार
पत्नी का नाम : डॉ. मोनिका आर्य
माता का नाम : डॉ. कांति मलेवार
शिक्षा : शास्त्री, बी . एड, एम. एड., पीएच.डी. (शिक्षा) एम. ए. (हिंदी एवं संस्कृत) एम. बी.ए. (मानव संसाधन)
जन्म तिथि : 6-2-1978
जन्म स्थान : रायपुर छत्तीसगढ़
अभिरुचि : लिखना, पढ़ना, काव्य पाठ एवं प्रेरक व्याख्यान देना
सम्प्रति : केंद्र सरकार की नौकरी
प्रकाशित कृतियाँ :
मेरे गुरुदेव, नहीं चाहिए मुझे तरक्की (काव्य संग्रह), ऋषि दयानंद की जरूरत क्यों? आज भी शामिल है दयानंद, सजना सजनी और गजनी
सजना सजनी और गजनी (व्यंग्य लेख) आज भी सामयिक हैं, ऋषि दयानंद , 200 से अधिक लेख, एवं अनेक साझा काव्य संग्रह
आदर्श : समाज सुधारक राष्ट्रवादी संत महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती को अपना आदर्श मानते हुए आर्य समाज के विचारों को आत्मसात करने का प्रयत्न किया। गुरुकुल प्रभात आश्रम मेरठ में पूज्य स्वामी विवेकानंद सरस्वती जी के चरणों में बैठकर शिक्षा दीक्षा प्राप्त की। जगद्गुरु ब्रह्मानंद आश्रम बणी पुण्डरी में पूज्य स्वामी बलेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज से आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त की।
सम्मान एवं, उपलब्धियां : एनसीईआरटी द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार, शिक्षा क्षेत्र पर उल्लेखनीय योगदान के लिए क्षेत्रीय पुरस्कार , अनेक सांस्कृतिक एवं सामाजिक सम्मान, डी ए वी मैनेजमेंट के द्वारा वैदिक विद्वान के रूप में सम्मानित किया गया ।
पूरा पता : डॉ अजय आर्य
जेन 12 गणपति विहार, बोरसी चौक दुर्ग छत्तीसगढ़
पिन कोड: 491001
दूरभाषः 9300540698
ईमेलः arya.akshara1@gmailcom.
Ghanshyam Prasad Sahu
+91-79872 78335
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