April 18, 2024   gpsahu



गायत्री महामंत्र सिद्धियों का भंडागार है!

गायत्री की साधना से सिद्धि को प्राप्त किए हैं आचार्य श्रीराम शर्मा जी

युग ऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने गायत्री मंत्र की कठोरतम  साधना की और 24 महापुरश्चरण करके सिद्धि प्राप्त की और विश्व मानवता के कल्याण के लिए उसकी साधना को सुलभ बना दिया है !

गायत्री मंत्र की महिमा के बारे में पढ़िए उनके विचार..

(- पं. घनश्याम प्रसाद साहू, संपादक छत्तीसगढ़ संदेश)


 "गायत्री के चौबीस अक्षरों का गुंथन ऐसा विचित्र एवं रहस्यमय है कि उसके उच्चारण मात्र से जिह्वा, कंठ, तालू एवं मूर्द्धा में अवस्थित नाड़ी -तंतुओं का एक अद्भुत क्रम से संचालन होता है। टाइपराइटर की कुंजियों पर उँगली रखते ही जैसे कागज पर अक्षर की चोट पड़ती है वैसे ही मुख में मंत्रोच्चारण होने से शरीर में विविध स्थानों पर छिपे हुए शक्तिचक्रों पर उसकी चोट पड़ती है और उनका सूक्ष्म जागरण होता है।" वाग्मय ११, पृष्ठ १.३


 "संसार में जितने भी महामंत्र हैं, उनमें गायत्री मंत्र को सर्वोपरि माना गया है। मनुष्य ही नहीं देवता भी इसी की उपासना करते हैं और इसी के बल पर अपना देवत्व सुरक्षित रखते हैं। यदि मनुष्य श्रद्धा पूर्वक वेदमाता की शरण को अपनाए रहे, तो वह भी अपनी मनुष्यता सुरक्षित रख सकता है।" वांग्मय १२, पृष्ठ ७.


 "एक गायत्री मंत्र ही ऐसा है, जिसकी हर कोई साधना कर सकता है। उसकी साधना में कोई विशेष जटिल और दुस्साध्य नियमों का प्रतिबंध भी नहीं है। नियमितता, पवित्रता और हृदय शुद्धि का ध्यान रखते हुए इस मंत्र की उपासना करने वाले साधक अपनी श्रद्धा -निष्ठा के अनुपात से लाभ उठा सकते हैं।" वांग्मय १४, पृष्ठ ३.५

पं. श्रीराम शर्मा आचार्य शांतिकुंज हरिद्वार

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