April 19, 2024   gpsahu



कविताएं जो आपके दिल को छू लेंगी...

पढ़ने की आदत बनाइए.. खुशहाल रहेंगे...

कविता 1

कितनी अजीब बात है

चौबीस की उम्र में तुम होठलाली नहीं लगाती

बालों को खुला रखती हो

किताबें प्रेमचंद की लिखी पढ़ती हो

धर्मवीर भारती जैसा लेखक तुम्हें इतना पसंद आ गया है कि

तुम चेतन भगत जैसों को घास तक नहीं डालती

पर मुझे यकीन है

तुम्हारी जिन्दगी में कोई

एक गुनाहों का देवता तो होगा ही


सुनो ! उस दिन तुम्हारी आंखों का काजल बहुत अच्छा था

इसे सिर्फ नज़र हटाने के लिए ही नहीं

कभी- कभी नजर लगाने के लिए भी लगाया करो

एक बात और खूबसूरती बड़ी चीज होती है

तुम ज्ञान- विज्ञान- साहित्य से निकल

आईने के अंदर खुदको देखकर भी मुस्कराया करो 


अरे ! जब तुम हंसती हो ना 

तो ऐसा लगता है कि 500 साल बाद मोनालिसा हंसने लगी है 

और जब उदास होती हो तो ऐसा लगता है 

एक खंजर अंदर तक धंस गया है

और जब तुम अपने दुपट्टे को उछाल 

अपने कंधे पर फेंकती हो ना 

तो ऐसा लगता है कि आसमान आज थोड़ा झुक सा गया है

क्या कहा अभी- अभी निर्मल वर्मा का

रात का रिपोर्टर खत्म किया है

प्लीज ! प्लीज ! चुप भी हो जाओ अब

मुझे तुम्हारे मिक्सेड इमोशन से डर लगने लगा है

क्या तुमने कभी ययाति नहीं पढ़ा ?

पढ़ा तो है। 

और कनुप्रिया ? 

जिया है। इनफैक्ट वर्षों से अपने अंदर उसी को तो जी रही हूं


फिर इतनी उदास क्यों हो ? इतनी गुमसुम ?

उदासियों को कभी-कभी भरमाया करो 

आंखें आईना हैं

दिल का हर राज़ पलकों के नीचे छुपाया करो

और इस बार आना तो माथे पर काली बिन्दी लगाकर आना

चांद जो आसमान में रहकर मैला हो गया है

उसे अपनी जुल्फों की खुली चांदनी में हर रोज़ नहलाया करो

सुनो, तुम ऐसे ही, सुनो तुम ऐसे ही, हर पल मुस्कराया करो।


- संजय शेफर्ड



कविता 2

 जन्नत वन्नत, परियाँ वरियाँ

सब अफसाने एक तरफ़

तितली भौंरे फूल और कलियां

मय मयखाने एक तरफ़


कंगन चूड़ी पायल बिछुवा 

सब आभूषण एक तरफ़

रस, दोहो, छंदों कविता की

मधुर सृजनता एक तरफ़


अमलतास के फूलों की

सब सुंदरता एक तरफ़

रात की रानी, रजनीगंधा

की कोमलता एक तरफ़


पूनम वाली रात की भी

सब मादकता एक तरफ़

इस दुनिया में जितनी भी है

सब सुंदरता एक तरफ़


दुष्यंत तुम्हारी शकुन्तला का

नखशिख वर्णन एक तरफ़

पुरुरवा तेरी उर्वशी का

रूप और यौवन एक तरफ़


दुनिया भर की दौलत शोहरत

का आकर्षण एक तरफ़

प्रेम में डूबे दो हृदयों का

भाव भरा मन एक तरफ़


©® दिव्या सिंह सिसोदिया

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