June 06, 2024   gpsahu



अशोक धीवर "जलक्षत्री" की प्रतिनिधि रचनाएं..

जीवन के विविध रंगों को अपनी तूलिका से आकर देते हैं कवि, पेंटर और मूर्तिकार अशोक धीवर..

1.

विधा- गजलनुमा गीत 

।। तो अच्छा होता ।।

समाज में जहर ना "घोलो," तो अच्छा होता।

बोल कड़वे ना "बोलो," तो अच्छा होता।।

भाई- भाई लड़ते हो, कोई नहीं पराया यहाँ।

सभी एक साथ "हो लो," तो अच्छा होता।।

दूसरों का दिल तड़पा कर, रुलाने वालों।

अपना दिल पहले *"टटोलो," तो अच्छा होता।। 

सभी सुखी रहें, सबका हो भला।

शुभकामनाएँ *"सँजो लो," तो अच्छा होता।।

तन ही नहीं मन भी है तेरा, खराब।

प्रेम पानी से "धो लो," तो अच्छा होता।।

लगी है आग सारे जहां में, विध्वंसक ।

बनके पवन झकोरा "ना डोलो," तो अच्छा होता।।

है रक्षा का भार, तुम्हीं पर इस देश का।

रात भर है जागना दिन में "सो लो," तो अच्छा होता।।

जैसा बोओगे वैसा ही, काटोगे इक दिन।

सत्कर्मों का बीज "बो लो", तो अच्छा होता।।

किसको कहें "जलक्षत्री", बुरा और भला।

पहले अपने को "तोलो," तो अच्छा होता।।


2.

।। वरषा रानी आई ।।


वरषा रानी आई, जल बरसाई।

वसुंधरा के सीने में, हरियाली छाई।।

तपनकर के सारे ताप, हरण कर लिए।

सभी प्राणियों के लिए, सुधापान दिए।।

कृषकों ने करी बड़ाई, खुशियां मनाई।

वरषा रानी आई........।।

जैसे वाद्य बन गया, नभ का वो श्याम घन।

चिडि़याएँ कलरव करतीं, खुश हुए सबका मन।।

तिमिर को मिटाने हेतु, तड़ित चमकाई।

वरषा रानी आई....... ।।

ताल और सरोवर में, नीर लबलबाया।

ज़मीं और गगन को जैसे, वारि ने मिलाया।।

सरिताओं में जैसे, आई तरूणाई।

वरषा रानी आई............ ।।

हरियाली तन में, हरियाली मन में।

बीज हुए अंकुरित, पतझड़ वन में।‌

कलम "जलक्षत्री" की भी, हरियाली पाई।।

वरषा रानी आई ...........।।



3.

।। सिसकती जिंदगी ।।


पतझड़ में हुए ठूँठ पर, क्या छाएगी हरियाली ।

क्या सिसकती जिंदगी में, आएगी खुशियाली ।।

एक फूल से यदि, जिंदगी आबाद होती।

तो मैं सारे विश्व में, फूलों का बाग लगाता ।।

दीन दुखियों को फूल बाँटने, मैं बन जाता माली ।

क्या सिसकती......... ।।

सम्मुख मेरे नीर भरा सरोवर है, फिर भी प्यासा का प्यासा हूँ।

नीर अंजलि में आता नहीं, ज्यों सरोवर हो जाता है खाली।

क्या सिसकती............. ।।

नीर न सही मद्य तो है, प्यास बुझाने को ।

क्षणिक ही सही, मित्रता तो निभाता है।। 

पर मेरे पास तो वह भी नहीं, खाली पड़ी है प्याली ।। 

क्या सिसकती.............…।।

बादल गरज कर भी , नहीं बरसता ।

 जितनी बरसती है, मेरी आंखें।।

 जिंदगी की अब आस नहीं, मौत आती नहीं साली ।।

क्या सिसकती...........।।

हाय रे मेरी किस्मत देखो, पंछी भी कतराने लगे।

 बैठा देख "जलक्षत्री" को, प्यासे ही लौटने लगे ।

मेरी किस्मत बन गई है, मेरे लिए चूहे की जाली।।

क्या सिसकती............।।


4.

।। शरमाने लगे हैं गुलाब ।।


आजकल लोग कैक्टस की, खेती करवाने लगे हैं ।

शायद इसीलिए गुलाब का फूल, शरमाने लगे हैं ।।

विदेशों से भी, कागज और प्लास्टिक का।

गुलदस्ता सस्ते में आने लगे हैं।।

गुलाब का कलम, लगवाने के बजाय।

लोग लोगों का सर, कलम करवाने लगे हैं।।

यूं तो कैक्टस और गुलाब, दोनों में हैं कांटे।

किंतु कैक्टस को श्रेष्ठ, मनवाने लगे हैं ।।

सुगंध का क्या है, लोगों को आजकल ।

गुलाब से ज्यादा , खुद को महकाने लगे हैं ।।

मुझे डर है गुलाब की, नस्ल ही खत्म ना हो जाए।

क्योंकि कैक्टस, हर घर में लगाने लगे हैं।।

वास्तव में गुलाब और कैक्टस, आप और हम ही तो हैं ।

वो कैसे "जलक्षत्री", पूछकर गाने लगे हैं ।।


साहित्यकार का  संक्षिप्त - परिचय  

रचनाकार -अशोक धीवर "जलक्षत्री" (दत्तकपुत्र)

जन्मदाता पिता- स्व. श्री गजाधर प्रसाद धीवर (पँडवानी गायक)

जन्मदात्री माता - स्व. श्रीमती सहोदरा धीवर

पालक पिता -स्व. श्री पुनूराम (बुल्ठूराम) धीवर

पालक माता -स्व. श्रीमती भगवंतीन धीवर

शैक्षणिक योग्यता -12 वीं

जन्मतिथि - 27/06/1972

कार्य (पेशा)- पेंटर एवं मूर्तिकार

समाज सेवा- अध्यक्ष ( छ.ग. धीवर समाज- रायखेड़ा राज)

प्रदेशाध्यक्ष - खेल एवं साहित्य प्रकोष्ठ (महासभा रायपुर छ.ग.)

प्रकाशित कृति - जय गणेश भगवान (लघु शोध ग्रंथ), नश्वर है जिंदगानी (काव्य संग्रह), नशा नाश की जड़ (साझा काव्य संग्रह संपादन), परिणय-पथ (समाजिक पत्रिका संपादन), अक्षरों के साये (साझा काव्य संग्रह संपादन), दहेज दानव (बहुभाषी "9 भाषा में" साझा काव्य संग्रह संपादन), नारी जग आधार (साझा काव्य संग्रह संपादन), उन्मुक्त अल्फाजों का सरमाया (साझा संग्रह सहसंपादन), बेटी बचाओ (राष्ट्रीय साझा साहित्य संग्रह संपादन) एवं 42 साझा काव्य संग्रहों में सहयोगी रचनाकार के रूप में प्रकाशित।

सम्मान -हिंदी साहित्य सृजक, साहित्य शिल्पी, हिंदी साहित्य रत्न, श्रेष्ठ दोहा सृजनकार, साहित्य सुरभि, राष्ट्रीय अग्रसर भाषा सारथी, सृजन चेतना अलंकरण, काव्य सौंदर्य सम्मान, साहित्य श्री, प्रणेता सम्मान, कर्मवीर सम्मान, प्रणेता सम्मान, विदित सम्मान, काव्यानुभूति सम्मान, काव्य उषा सम्मान, संगम साहित्य सम्मान, प्रेम पथिक सम्मान, डायरी गौरव सम्मान, राष्ट्र हिन्दी साहित्य सेवा सम्मान, नशा विरोधी वीर सम्मान, दहेज विरोधी वीर सम्मान, श्री राम साहित्य सेवा रत्न, साहित्य भारत सेवा रत्न, छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना सम्मान, प्रेम पथिक सम्मान, नारी संरक्षक सम्मान, काव्य उषा, महाकवि तुलसी सम्मान, बेटी संरक्षक सम्मान,

लेखन विधा- कविता, गीत, गजल, छंद, लघुकथा एवं आध्यात्मिक समीक्षा

लेखन भाषा - हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी 

पता - "सदगुरु कृपा सदन"

रामनगर वार्ड नंबर- 16, (रावणभाठा)

पोस्ट - नेवरा, पिन कोड- 493114 

ग्राम- तुलसी (तिल्दा-नेवरा)

जिला- रायपुर (छत्तीसगढ़) 

मोबाइल नंबर - 9300716740

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