बाल साहित्य के सृजन की दिशा में अभी बहुत काम करने की जरूरत है।बाल साहित्य की रचना के प्रति रचनाकारों का रुझान जरा कम है। वज़ह चाहे जो भी हो जबकि भविष्य बाल और किशोर पर निर्भर है। ऐसे समय में बलदाऊ राम साहू जी की लेखनी आस जगाती है।
हाल ही में प्रकाशित उनकी बाल और किशोर मन की छत्तीसगढ़ी कहानियां " चिंकी के सपना " प्रकाशित हुई है।इसमें 26 कहानियां दर्ज हैं।लोकभाषा में लिखी ये कहानियां प्रभावोत्पादक हैं,बाल एवं किशोर मन पर अपनी अमिट छाप छोड़ जाती हैं।पुस्तक के शीर्षक वाली कहानी "चिंकी के सपना " में बलदाऊ राम जी ने लिखा है-" चिंकी हर आमा के रुख ले धाएं उतरय ,धाएं चढ़य।जउन भी ओला फरिया, सुतरी,पोनी मिलय ,ओला मुंह म धरय अउ अपन खोड़रा म रख दें।"
ये चिंकी चिटरा एक गिलहरी का नाम है।उसको बच्चा होने को है जिनके लिए मुलायम बिस्तर का इंतज़ाम कर रही है।इस कहानी के माध्यम से किशोर मन को यह संदेश दिया गया है कि आने वाले कल की चिंता हरएक को करनी चाहिये जबकि हम आज की चिंता करते रहते हैं।ये कहानी 13 वें नम्बर पर है।
इसी प्रकार उनकी एक कहानी है " इनाम के हकदार।" इस कहानी में मनोहर नाम का एक होशियार लड़का है जिसे बड़े गुरुजी के हाथों इनाम मिलता है।वह सोचता है कि जो उससे थोड़ा ही कम है पढ़ने में उधो ,असली इनाम का हक़दार तो वो है क्योंकि वह अपने घर के सारे काम-काज करता है।इसके बाद वह पढ़ाई करता है।उसे इतनी सुविधा भी नहीं मिलती जितनी मनोहर को मिलती है।मनोहर अपना इनाम ले जाकर उधो को दे देता है जिसकी सब लोग प्रशंसा करते हैं।यह कहानी एक छात्र के त्याग और सोच को दर्शाती है।यह कहानी 14 वें नम्बर पर पुस्तक में प्रकाशित है।
अपने प्रकाशकीय में सत्य प्रकाश सिंह जी लिखते हैं-" साहित्य की विविध विधाओं पर समान रूप से अधिकार रखने वाले आदरणीय बलदाऊ भैया की विशेष ख्याति पूरे देश में उनके बाल और किशोर साहित्य की रचनाधर्मिता को लेकर रही है।छत्तीसगढ़ राज में बाल और किशोर साहित्य के प्रमुख स्तंभ में वे एक हैं।"
कहानियों की भाषा सहज ,सरल और प्रांजल है।उनके लेखन का शिल्प तो कहानियों के शीर्षकों को ही देखकर जाना-समझा जा सकता है।कुछ कहानियों के शीर्षक द्रष्टव्य हैं-जुग के दधीचि,महुआ के संग गोठ,पाररासनिन डोकरी,रामू अउ टामी, तुरकिन दाई इत्यादि।
बलदाऊ राम साहू जी की हर कहानी में देश, काल,वातावरण का जीवंत चित्रण है।उदाहरण के लिए देखें-" बरसात के समे आय।चारों मुड़ा हरियाली छाय हे रूख-राई, नार-बियार सबो खुस हे।कोनो कोती संसो अउ फिकर के बात नइ हे।खाय बार पोठ खाई हे अउ पिये बर अड़बड़ पानी।का रूख-राई का जीव परानी ?जंगल के सबो जीव खुस हें।"
बलदाऊ राम साहू जी का जन्म बालोद जिले के ग्राम सिर्रा भांठा में 21 फरवरी 1958 को हुआ।आप हिंदी और संस्कृत में डबल एमए हैं।एमएड भी आपने दुर्ग,रायपुर से की है।अब तक उनके 7 बालगीत संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।इसके अलावा हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी में दर्जनों किताबें साहित्य की विविध विधाओं में , प्रकाशित हो चुकी हैं।शासकीय सेवा से निवृत होने के पश्चात स्वतंत्र लेखन और समाज सेवा में संलग्न हैं।यह पुस्तक शिक्षादूत प्रकाशन ,दिल्ली-रायपुर दोनों जगह से प्रकाशित है।
इस संग्रह का आवरण पृष्ठ लतिका वैष्णव ने तैयार किया जो अत्यंत आकर्षक बन पड़ा है।लतिका अभी छात्रा हैं जिनकी कूची से कमाल के चित्र तैयार होते हैं।बैक कव्हर पर बलदाऊ राम जी का जीवन परिचय छपा है।इस पुस्तक का मूल्य मात्र 350 ₹ है।
इस पुस्तक के प्रकाशन पर श्री साहू को बधाई।अपेक्षा है कि यह संग्रह बालसाहित्य जगत में मील का पत्थर साबित होगी।
हाउस नंबर-37, पत्रकार कॉलोनी,
रिंग रोड 2, गौरव पथ, नर्मदा नगर रोड
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
Ghanshyam Prasad Sahu
+91-79872 78335
chhattisgarhsandeshnews@gmail.com
© Chhattisgarh Sandesh. All Rights Reserved. Developed by TechnoDeva