June 30, 2024   gpsahu



रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ बाल वाटिका 3 का शाला प्रवेश उत्सव सम्पन्न

बच्चों को सुनने और बोलने का अधिक अवसर दें: उमाशंकर मिश्र

पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय दुर्ग में बाल वाटिका तीन का शाला प्रवेश उत्सव धूमधाम से मनाया गया। नन्हे बच्चों ने नृत्य के साथ समा बाँधा। 


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अध्यापक कमल नारायण सोनी ने अभिभावकों को जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों को बाल वाटिका में बिना ड्रेस के बिना सिलेबस के गतिविधियों के माध्यम से ही शिक्षण प्रक्रिया कराई जाती है। जिसे अनुभवात्मक शिक्षा कहा जाता है। प्रवेश प्रभारी एम के बोरकर ने सभी को केंद्रीय विद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी दी।


 डॉ अजय आर्य ने कहा-

बच्चों को हमेशा सिखाने के बजाय कभी -कभी हमें उनसे भी सीख लेना चाहिए। 

कभी चलते थे जो उंगली पकड़कर अब चलना सिखाते हैं !

किस ओर चलना है, मेरे बच्चे अब मुझको बताते हैं !! 

केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य ने कहा कि विद्यालय के शिक्षक अपने छात्र -छात्राओं एवं अभिभावकों के लिए हमेशा उपलब्ध हैं उनकी समस्या सुनने के लिए सदा तैयार रहते हैं। प्राचार्य श्री उमाशंकर मिश्र ने कहा- शिक्षक की अधिगम प्रक्रिया में सुनना और बोलना पहले क्रम में है। उसके बाद पढ़ना और लिखना है । आजकल हम लोग लिखने पर ज्यादा ज़ोर दे रहे हैं और वहीं से शुरू कर रहे हैं। जो कि मनोवैज्ञानिक तरीके से गलत है। बच्चों को माता -पिता घर में सुनने और बोलने का अधिक अवसर दें। बच्चे घर में ही तमिल, तेलुगु, मराठी एवं दूसरी भाषाएं घर में माता -पिता को बोलते और सुनते देख करके ही सीख लेते हैं। इसलिए बच्चों को सुनने और बोलने की पूरी स्वतंत्रता दें। 


वरिष्ट शिक्षिका मधु थपलियाल एवं एस पी एस गायत्री सहित शिक्षक शिक्षिकाओं एवं प्राचार्य ने नव प्रविष्टि बच्चों का उपहार देकर स्वागत किया।


 इस आयोजन को सफल बनाने में श्रावणी, ज्योति जी, मेघा, पी एन सोनी, मोनिका, मोनिका श्रीवास्तव, प्रतिभा निषाद, नसीम, नितिन, रीखेंद्र आदि ने अपना सम्पूर्ण योगदान दिया।


कार्यक्रम के पश्चात मुख्य अध्यापक के एन सोनी एवं प्राचार्य उमाशंकर मिश्र सभी अभिभावकों से व्यक्तिगत तौर पर मिले और उन्होंने कहा- बच्चे हमारे और आपकी साझी विरासत भी हैं और जिम्मेदारी भी हैं। केंद्रीय विद्यालय मूल्य परख शिक्षा पर विश्वास करता है। बच्चों के भीतर संस्कार आचार विचार और व्यवहार विकसित होना चाहिए। मैं प्राचार्य होने के नाते अपने सभी अभिभावकों के लिए हमेशा उपलब्ध हूं। आप मेरे चेंबर में कभी भी समस्या और सुझाव लेकर आ सकते हैं। हम अपने समर्थ के अनुसार समाज को बेहतर शिक्षा देने का प्रयत्न कर रहे हैं।


कमल नारायण सोनी मुख्य अध्यापक ने अभिभावकों से आग्रह किया की बच्चों को स्वास्थ्यप्रद भोजन देने का प्रयत्न करें। जल्दबाजी के चक्कर में मैगी आदि फास्ट फूड बच्चों को ना दें यह शौक पूरा करने के लिए अच्छा हो सकते हैं किंतु इस उम्र में बच्चों के बौद्धिक एवं मानसिक विकास के लिए उन्हें अच्छा भोजन जो आप बनाकर दे सकते हैं वह जरूरी है। बच्चों को पर्याप्त पानी और घर का बना हुआ पौष्टिक भोजन देकर विद्यालय भेजें। 


डॉ अजय आर्य ने अभिभावकों को यह स्पष्ट किया कि बाल वाटिका के लिए कोई प्रिसक्राइब्ड सिलेबस और यूनिफॉर्म नहीं है किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि इससे शिक्षण प्रक्रिया काम प्रभावित होगी। बच्चों को सहज रूप से आसपास के वातावरण को देखकर सीखने की योग्यता का विकास करना ही बल वाटिका का मुख्य लक्ष्य है। इसमें अनेक तरह की एक्टिविटी होती हैं। यहां बच्चों को खिलौने से सिखाया जाता है, बच्चों को खेलने के नए तरीके सिखाए जाते हैं। जिसके माध्यम से बच्चों को पहचाना जानना याद करना और अपनी स्मृति के आधार पर नए विचारों को विकसित करना सिखते हैं। बच्चों की शिक्षा गतिविधियों पर आधारित है इसके लिए बच्चों को स्मार्ट बोर्ड, टीवी और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं।

 कार्यक्रम के अंत में अभिभावकों को बाल वाटिका के शिक्षिकाओं से परिचित कराया गया। अभिभावकों को बच्चों की क्लास दिखाई गई जिससे वह बहुत प्रसन्न हुए। श्रीमती संगीता डोंगरे सहित अनेक अभिभावक ऐसे थे जिन्होंने कक्षा और उसकी व्यवस्था को देखकर प्रसन्नता जाहिर की।

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