July 01, 2024   gpsahu



पुरवाही साहित्य समिति की मासिक गोष्ठी में संत कबीर को याद किया गया

संत कबीर आज सबसे ज्यादा प्रासंगिक हैं: लखन लाल साहू "लहर"

छुरिया में कोमल सिंह गुरू के निवास में पुरवाही साहित्य समिति पाटेकोहरा (छुरिया) के बैनर तले परिचर्चा व मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। वरिष्ठ गीतकार श्री अरविंद कुमार लाल "लमसेना"जी के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत माँ शारदे की पूजन वंदन से हुई। कार्यक्रम का आयोजन दो सत्र में रखा गया था। प्रथम सत्र में संत कबीरदास जी का जीवन परिचय एवं वर्तमान में उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा -परिचर्चा हुई तथा द्वितीय सत्र में उपस्थित रचनाकारों द्वारा सरस काव्य पाठ किया गया।

 प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि शारदा साहित्य समिति निकुम, बालोद और साकेत साहित्य परिषद के मार्गदर्शक वरिष्ठ गीतकार प्यारेलाल देशमुख थे एवं अध्यक्षता साकेत साहित्य परिषद सुरगी के अध्यक्ष, गीतकार, हास्य कवि लखन लाल साहू "लहर " ने की।

परिचर्चा में आधार व्यक्तव्य पुरवाही साहित्य समिति के संयोजक ओमप्रकाश साहू 'अंकुर' सुरगी ने प्रस्तुत किया। अंकुर ने संत कबीरदास के जीवनी पर प्रकाश डाला और उनके विभिन्न दोहे के उदाहरण देकर कहा कि उन्होंने आंडंबरों का विरोध कर तत्कालीन समाज में जनजागरण कर एक क्राति ला दी। वे एक क्रांतिकारी कवि एवं महान समाज सुधारक थे। उन्होंने हिंदू और मुसलमान दोनों धर्म के मठाधीशों को उनके पाखंड के लिए अपनी रचनाओं के माध्यम से गहरा कटाक्ष किया। आज जब लोग धर्म के नाम पर लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए हैं। ऐसी स्थिति में कबीर के संदेश रेगिस्तान में हरियाली लाने के समान है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्यारे लाल देशमुख ने कबीर के साखी एवं दोहे का सस्वर पाठ कर उनके संदेश को लोगों तक पहुंचाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे लखन लाल साहू लहर ने कहा कि संत कबीर ने समाज में जागरूकता एवं समरसता की भावना को फैलाया। वे भक्तिकाल के निर्गुण भक्ति शाखा के सबसे बड़े कवि है। एक ओर उन्होंने मूर्तिपूजा का विरोध कर लोगों को ठगने से बचाया तो दूसरी ओर प्रकृति पूजा को महत्व देकर लोगों को पर्यावरण के प्रति सचेत भी किया। दिखावा, पाखंड की कड़ी आलोचना कर लोगों को सद्मार्ग पर चलने के लिए एक भगीरथ प्रयास किया। आज जब लोग अपने ही धर्म और अपने ही भगवान को सर्वश्रेष्ठ और दूसरे धर्म को कमतर आंकने पर तुले हुए ऐसी स्थिति में संत कबीर के विचार प्रचंड गर्मी में शीतलता फैलाने का काम कर रहे हैं। पुरवाही साहित्य समिति पाटेकोहरा, छुरिया के अध्यक्ष ग्वाला प्रसाद यादव नटखट, छंदकार राम कुमार चंद्रवंशी, कुलेश्वर दास साहू साहित्यकार मोखला, कोमल सिंह गुरू, कैलाश साहू कुंवारा ने संत कबीर के विभिन्न दोहे और साखी का उदाहरण देते हुए कहा कि वे मानवता के सच्चे पुजारी थे। उन्होंने समाज में प्रेम एवं भाईचारा का संदेश फैलाया। उन्होंने कहा कि इंसान अपने कर्म से ही महान बनता है। यदि कांशी पवित्र है तो मगहर भी पवित्र है। मगहर में अपना देह त्यागकर उन्होंने लोगों को सार्थक संदेश दिया। आज संत कबीर के विचारों को आत्मसात करने की जरूरत है।


कवियों ने विभिन्न रसो से ओतप्रोत रचनाएं पढ़ीं 

दूसरे सत्र में सरस काव्यपाठ का आयोजन हुआ। इस सत्र के मुख्य अतिथि वरिष्ठ नागरिक मदन लाल देवांगन थे एवं अध्यक्षता हास्य व्यंग्य कवि कैलाश कुमार "कुंवारा" बम्हनी बालोद ने की। विशिष्ट अतिथि कुलेश्वर दास साहू सचिव, साकेत साहित्य परिषद सुरगी थे। सरस काव्यपाठ के दौरान कवियों ने अपनी सरस प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध कर दिया। काव्यपाठ में सर्वप्रथम कुलेश्वर दास साहू द्वारा सरस्वती वंदना एवं हास्य व्यंग्य, वरिष्ठ छंदकार कवि रामकुमार चंद्रवंशी जी ने छंदबदध गीत, नंदकुमार कुमार साहू नादान ने आल्हा एवं सवैया छंद के माध्यम से खेती- किसानी पर गीत, वरिष्ठ गीतकार प्यारेलाल देशमुख एवं कैलाश कुमार कुंवारा जी ने राजनीति पर हास्य व्यंग्य, छंदकार हेमलाल सहारे जी और ओमप्रकाश साहू 'अंकुर' ने मौसम, खेती किसानी पर आधारित छंदबदध रचना, अरविंद कुमार लाल जी ने श्रृंगारिक गीत, लखन लाल साहू लहर ने भी अषाढ़ गीत, यूनुस अजनबी जी ने ओजपूर्ण देश भक्ति गीत, कोमलसिंह गुरु ने सुमधुर आवाज मे पर्यावरण संरक्षण पर आधारित गीत और अंत मे ग्वाला प्रसाद यादव 'नटखट' ने सम सामयिक विषयों पर हास्य व्यंग्यपरक गीत और कविता प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम में काव्यप्रेमी मोहनदास खुटेल, राजेन्द्र गोस्वामी, रतिराम अहीर, गगन साहू उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन ग्वाला प्रसाद यादव नटखट और नंद कुमार साहू नादान एवं आभार व्यक्त कोमल सिंह गुरू ने किया।

Related Post

Advertisement



Trending News

संपादकीय

Get In Touch

Ghanshyam Prasad Sahu

+91-79872 78335

chhattisgarhsandeshnews@gmail.com

© Chhattisgarh Sandesh. All Rights Reserved. Developed by TechnoDeva