July 08, 2024   gpsahu



साप्ताहिक रविवारीय प्रेरक कहानी.. "आंख वाला अंधा"

अंधा वह नहीं जो देख नहीं सकता, बल्कि वह है, जो जान बूझकर गलत काम करता है

भाई के स्वागत में बहन ने हलवा बनाया और भाई को हलवा खिलाई।

हलवा खाने के कुछ देर बाद भाई ने जो खाया उसे देखकर बहन ने कहा, "चलो तुम्हें अस्पताल ले चलना है।"

"मैं अस्पताल क्यों जाऊंगा?"

"तुम्हारी आंखों की जांच कराना।"

"मेरी आंखों की... मेरी आंखों की... मेरी आंखें तो ठीक है। मैं क्यों अस्पताल जाऊंगा?"

"नहीं भैया ! तुम गलत बोल रहे हो तुम्हारी आंखें खराब है। न देखते हो ना पढ़ते हो। तुम्हें डॉक्टर के पास ले जाना  ही पड़ेगा।"           

"कैसी पगली जैसी बातें करती हो? मैं फालतू डॉक्टर के पास नहीं जाऊंगा, नहीं जाऊंगा... !"

"अच्छा नहीं जाना है तो मत जाना। तुम सचमुच अंधे हो, नासमझ हो..!

बहन की तीखी बात सुनकर भाई को बुरा लगा और जोर का गुस्सा भी आया, किन्तु थोड़ी देर खुद को सम्भाल कर बोला, "कैसी बेतुकी बातें करती हो?" मैं तुमको अंधा लगता हूं ?

बहन के कहा, प्यारे भाई! मेरी बातें तुमको कड़वी लगी, मैं माफ़ी चाहती हूं, लेकिन जो तुम कर रहे हो, वह तुम्हारे जीवन के लिए बहुत घातक है!

यदि तुम अंधे एवं नासमझ नहीं होते, तो तुम्हारी बुद्धि सही होती।" कहती हुई बहन ने कुर्सी के नीचे गिरे हुए पाउच को उठाया और बोला, "इसमें कौन सा चित्र छपा है और क्या लिखा है? देखो और पढ़ो.. तब मैं समझूंगी कि तुम अंधे नहीं हो और तुम्हारी बुद्धि भी सही है।"


भाई ने पाउच को हाथ में लेकर कहा, इसमें तो बिच्छू, सर्प और कैंसर का चित्र है और लिखा है कि इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।"

"तब बताओ अनपढ़ एवं अंधे हो कि नहीं?"

"बहन, तुमने मेरी आंखें खोल दी। आज से मैं गुटखा, पाउच जैसी नशीली वस्तुओं का सेवन नहीं करूंगा।"

"तुमसे बढ़कर मेरा हितैषी कौन हो सकता है," कहकर भाई ने अपनी बहन को गले से लगा लिया !


सीख: यदि मनुष्य जान बूझकर गलत कार्य को कर रहा है, तो समझ लीजिए कि वह सचमुच अंधा है ! कहा भी गया है: को अंधः यो कार्यरतः!


लेखक 

आचार्य दिनेंद्र दास

कबीर आश्रम करहीभदर

अध्यक्ष मधुर साहित्य परिषद

तह इकाई बालोद, जिला- बालोद छग

मो 08564886665

 

संपादकीय टीप:

आचार्य दिनेंद्र दास पिछले कुछ समय से रविवारीय प्रेरक कहानी लिख रहे हैं ! आपकी कहानियां अत्यंत सरल, सहज किन्तु उर प्रेरक रहती हैं ! इन कहानियों से युवा पीढ़ी प्रेरित हो रही है।


पं. घनश्याम प्रसाद साहू

संपादक छत्तीसगढ़ संदेश

8269970135, 7987278335

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