दुर्ग/ पीएम श्री योजना के तहत सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम का केंद्रीय विद्यालय दुर्ग द्वारा आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत फील परमार्थम फाउंडेशन सेक्टर 3 पहुंच कर केंद्रीय विद्यालय दुर्ग के 210 छात्रों ने सामुदायिक समाज सेवा के इस मॉडल को देखा।
प्राचार्य उमाशंकर मिश्र ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा- भावना शून्य मनुष्य का जीवन निरर्थक है। मनुष्य वही है जो सद्भावनाओं के साथ सभी की उन्नति की इच्छा करें। इसलिए हमारी प्रार्थना "सर्वे भवंतु सुखिन:" से आरंभ होती है।
कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. अजय आर्य ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षा तभी सफल है जब वह संवेदनाओं को विकसित कर सके। केंद्रीय विद्यालय इस बात पर विश्वास करता है कि प्रेम, करुणा, सद्भाव ही मानव की असली पूंजी है। इस तरह के कार्यक्रमों का की आयोजन का उद्देश्य यही है की छात्र अपने जीवन मूल्यों में समुदायिकता तथा सामाजिक कर्तव्य की भावना को आत्मसात कर सकें।
कार्यक्रम में सतविंदर कौर, श्री गणेश ओझा, तोषन लाल साहू, सुश्री तरुणा संकरी, गीता माली, नितिन, नीता दास, अमित ने छात्रों की सुरक्षा का दायित्व निभाया।
छलक आए आंसू
संस्था में प्रवेश करने के बाद छात्र -छात्राओं ने देखा की बुजुर्गों की चिकित्सकों एवं नर्स के द्वारा सेवा की जा रही है। कुछ बुजुर्ग बोलने में बिल्कुल अक्षम है। संस्था में उपचार के लिए दो कक्ष हाल पुरुषों के लिए एवं महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था है। बच्चों को देखकर कुछ बुजुर्गों की ममता फूट पड़ी। वृद्ध जनों की स्थिति एवं परेशानी देखकर बहुत से विद्यार्थियों के आंखों में आंसू आ गए। कुछ छात्राएं तो फूट -फूट कर रोने भी लगी। कुछ शिक्षकों की भी आंखें नम हो गई थी। छात्र -छात्राओं ने मन ही मन यह संकल्प लिया कि वह बुजुर्गों की सेवा करेंगे और उनके घर के बुजुर्ग कभी बेसहारा नहीं होंगे।
संस्था का उल्लेखनीय कार्य
सड़कों पर रह रहे बेसहारा बुजुर्ग एवं मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों को यह संस्था नया जीवन देती है। संस्था के संचालक अमित राज ने जानकारी देते हुए बताया कि पहले भी रात्रि में बेसहारा बुजुर्गों को भोजन बांटते थे। उस दौरान उन्होंने बुजुर्गों का शोषण देखा और कई लोगों की मौत भी देखी। तब यह लगा कि सिर्फ भोजन इनके जीवन की आवश्यकता नहीं है।
वर्तमान में फील परमार्थम् फाउंडेशन में 73 बुजुर्ग रह रहे हैं जिसमें स्त्री और पुरुष दोनों शामिल हैं। संस्था की मदद से 32 लोगों की घर वापसी हुई है। बुजुर्गों के घर वालों को ढूंढ कर उनसे संपर्क करके बुजुर्गों को सौंपा गया है। 25 बुजुर्गों का यहां रहते हुए देहांत हुआ है जिनके संपूर्ण अंतिम विधि विधान पूर्वक क्रिया संस्था ने ही की है। यहां आने के बाद बुजुर्गों की पूरी देखरेख रहन-सहन खान पान दवा पानी सभी जरूरतों को संस्था पूरा करती है।
संस्था के सभी सदस्य एक टीम के रूप में कार्य करते हैं। संस्था के पास एक गाड़ी है जो बुजुर्गों का रेस्क्यू करती है या उन्हें अपरिचित जगह से लेकर आती है।
अमित राज, लकी, लक्ष्मी, संदीप, पारुल, अजय मंडल, अजय चौधरी जे वेणु राधेश्याम, अमन नैय्यर, मयंक शिंदे, गणेश सिंह, संध्या यादव, शैल यादव, कृष्णा सुनीता साहू के सहयोग से संस्था कार्य कर रही है।
केंद्रीय विद्यालय ने किया सहयोग
केंद्रीय विद्यालय द्वारा आज इस संस्था को एक कार्टून डायपर, 50 किलो आटा 50 किलो चावल, 75 टूथपेस्ट, 75 टूथब्रश, 75 बिस्कुट के पैकेट नमकीन एवं मीठे, 75 लाइट नमकीन चिवड़ा का पैकेट, 75 साबुन नहाने का, 75 साबुन कपड़े धोने का संस्था को प्रदान किया गया।
इस कार्यक्रम के लिए केंद्रीय विद्यालय के अलावा पुष्पा बड़ा, उषा शर्मा, तरुणा संकरी, सतविंदर कौर, पुरुषोत्तम साहू, जीबी मराठे, एम ए नंदनवार, नीता दास, आदि ने सहयोग किया।
प्राचार्य उमाशंकर मिश्र ने बीएसएफ के कमांडेंट अभिजीत सिंह का विशेष धन्यवाद किया। बीएसएफ द्वारा छात्र-छात्राओं के बस द्वारा आने जाने की व्यवस्था की गई थी।
Ghanshyam Prasad Sahu
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