November 23, 2024   gpsahu



बैगलेश डे पर दीपावली की धूम: रचा गया गौरा गौरी विवाह, गायों को बांधी गई सोहाई

भारत की सांस्कृतिक विरासत समृद्ध है और इसे नई पीढ़ी में हस्तांतरित करने की जरूरत है: छन्नूलाल साहू

दुर्ग/ छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग एवं एससीईआरटी के वार्षिक शैक्षिक कार्यक्रम के तहत शनिवार के दिन को "बैगलेश डे" घोषित किया है! इस दिन विद्यालय में गतिविधि आधारित शैक्षिक कार्य किया जाता है; जैसे कि साहित्यिक, सांस्कृतिक, शारीरिक एवं कौशल आधारित शिक्षा। विभाग द्वारा प्रत्येक शनिवार के लिए एक विषय निश्चित की गई है। इसी के तहत बच्चों को 16 नवंबर 2024 शनिवार को पांच दिवसीय दीपावली महोत्सव की जानकारी दी गई।


बता दें, कि शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुम्हली विकास खंड पाटन जिला दुर्ग के प्रधान पाठक सी एल साहू ने छात्रों के माध्यम से पांच दिवसीय दीपावली महोत्सव की रूपरेखा तैयार कर कार्यक्रम आयोजित करने की पहल की। प्रथम चरण में धनतेरस पर्व पर सभी कक्षाओं के द्वार पर तेरह मिट्टी के दिए जलाकर भगवान धन्वंतरि की पूजा की गई। ज्ञात हो कि समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे, जो कि भगवान विष्णु के अंशावतार थे। दूसरे दिवस नरक चतुर्दशी के दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था। इस दिन कृष्ण की पूजा राधारानी जी के साथ करने की कथा है। तीसरे दिन सुरहुती, जिसे दीपावली कहा जाता है, सभी ग्रामीण देवी देवताओं और घरों मिट्टी के दिए जलाकर रोशन जाता है । विद्यालय के सभी कमरों और मां शारदा के मंदिर पर दिए जलाए गए। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा विशेष विधि विधान से की जाती है। कार्यक्रम में उपस्थित पालकगण, शिक्षक, छात्र सभी ने मिलकर मां लक्ष्मी की पूजा की। इसी दिन मां काली व्याह कर अपने ससुराल गई थी। इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने विद्यालय में गौरा गौरी की मूर्ति बनाने के पश्चात विधिवत पूजा के साथ गौर माटी लाए गए। बालिकाओं द्वारा प्रत्येक कक्षा के सामने घर के प्रतीकात्मक स्वरूप में सुवा नृत्य प्रस्तुत किया गया। घर मालकिन ने उन बालिकाओं को सगुन भेंट के रूप मे एक सूपा धान और रुपए पैसे प्रदान किया।  तत्पश्चात घर घर जाकर कलशा परघनी स्वरूप घर मालकिन से धन धान्य से भरा ज्योतिमय कलशा भेंट किए, जिसे गौरा गौरी चौक पर स्थापित किए जाते हैं। विद्यार्थियों ने नाचते कूदते, बाजे गाजे और ईसर गौरा गौरी के जयकारे के साथ भव्य बारात निकाली गई। नगर भ्रमण कर विद्यालय कला मंच पर स्थापना करके विधि विधान से ईसर गौरी गौरा की पूजा अर्चना की गई। चौथे दिन गोवर्धन पूजा की गई। गौ माता को स्नान कराकर उसकी आरती उतारी गई, गोबर से गोवर्धन पहाड़ बना कर पूजा करने के बाद गौमाता को गोवर्धन पहाड़ पर चढ़ाकर परंपरा का निर्वहन किया। पारंपरिक यादव वेशभूषा से सुसज्जित बच्चों ने गौमाता को सोहई पहनानी और कबीर, सूर, तुलसीदास के जमकर दोहे पारे! काछन चढ़े नाचे, विद्यालय और आसपास का वातावरण पुनः दिवाली त्योहार के आनंद और हर्षोल्लास से सराबोर हो गया। 



 इस आयोजन से शिक्षा का सीधा तारतम्य जैसे अनेक पौराणिक कथाएं याद आती है। छात्रों के सामान्य ज्ञान बढ़ता है। हमारा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद मजबूत होता है। पाठ्य सहगामी क्रियाओं से छात्रों में समझ  विकसित होती है।


इस कार्यक्रम को पालकों ने बहुत सराहा और सक्रिय भागीदारी भी निभाई। प्रधान पाठक छन्नूलाल साहू ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत समृद्ध हैं। इसे अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए पीढ़ियों को संजीदगी से हस्तांतरित करना बहुत आवश्यक है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापक यशोदा नायक ने कहा कि इस तरह का आयोजन विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सामाजिक दायित्व का एहसास कराता है। जिससे बच्चे बड़े होकर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को बखूबी निर्वहन करने योग्य बनते हैं। 


इस अवसर पर विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक हुषणलाल चंद्राकर, पोषण कुमार साहू, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भुनेश्वरी साहू, जमूना चंद्राकर, शशिकला चंद्राकर, नेमिन महिपाल विशेष उपस्थित रहीं।

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