रायपुर 10 दिसंबर/ राज्य आंदोलनकारी छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी एवं छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा के संयुक्त तत्वाधान में शहीद वीर नारायण सिंह का बलिदान स्थल जय स्तंभ चौक में दोपहर 1:00 बजे से संध्या 5:00 बजे की अवधि में श्रद्धांजलि सभा और संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर क्रांतिकारी वीर नारायण सिंह जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अंतरराष्ट्रीय पंडवानी कलाकार चेतन देवांगन द्वारा पंडवानी तर्ज पर शौर्य गाथा प्रस्तुत किया गया। अंतर्राष्ट्रीय एका अभिनय कलाकार सुश्री ममता आहार एवं उनकी स्कूली छात्राओं द्वारा क्रांतिकारी शहीद वीर नारायण सिंह के ऊपर जन जागरण गीत प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रीय लोक कलाकार राकेश तिवारी द्वारा शहीद वीर नारायण सिंह के शौर्य गाथा पर आधार आल्हा तर्ज पर गीत प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रीय स्तर के मधुर कवि मीर अली मीर द्वारा दो वीर रस गीत पेश किया गया। छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय रमायनी नंदकुमार साहू की मंडली ने स्वरचित शहीद वीर नारायण सिंह शौर्य गाथा (पंथी धुन में) पेश कर तालियां बटोरी। दोपहर 3:00 बजे से शहीद वीर नारायण सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ इतिहासकार डॉ रमेंद्र मिश्र ने किया। इसके प्रमुख प्रतिभागी वरिष्ठ इतिहासकार के. के. अग्रवाल, शिक्षाविद प्रो. घनाराम साहू, प्रेस क्लब रायपुर के महासचिव डॉ.वैभव पांडे आदि थे। गोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए प्रो. घनाराम साहू ने कहा कि 1857 की महान क्रांति को समझना है, तो रायपुर जिला के जेल और आसपास की जमींदारी से बाहर निकलकर संबलपुर जेल और वहां के 18 गढ़ों में जाना होगा। क्योंकि 1857 में ये सभी रायपुर कमिश्नरी के अंग थे और क्रांति वर्तमान झारखंड के सिमडेगा से बिंद्रा नवागढ़ तक वर्तमान 8 जिलों में हुई थी। शहीद वीर नारायण सिंह केवल सोनाखान के नहीं वरन इन सभी जमींदारियों के नेता थे। डॉ. के. के. अग्रवाल ने द्वारा वीर नारायण सिंह के बलिदान स्थल जय स्तंभ चौक का प्रमाण प्रस्तुत किया गया। डॉ. वैभव पांडे ने कहा कि दूसरे क्षेत्र के क्रांतिकारी शहीदों के इतिहास को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया गया, वहीं छत्तीसगढ़ के गौरव पुरुष शहीद वीर नारायण सिंह के इतिहास को शासन प्रशासन द्वारा उपेक्षित किया गया। गोष्ठी के अध्यक्ष डॉ रमेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि हमारे क्षेत्र में क्रांतिकारियों और शहीदों की लम्बी श्रृखंला है, लेकिन उनके इतिहास को गहनता से खोजने एवं राष्ट्रीय भवन एवं स्थल को संरक्षित करने की जरूरत है। बता दें कि वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ के एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उनका जन्म 1795 में सोनाखान में हुआ था। वह एक साहसी और दृढ़ नेता थे जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और छत्तीसगढ़ की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
वीर नारायण सिंह का संघर्ष: वीर नारायण सिंह ने 1825 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया। उन्होंने अपने सैनिकों के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ कई लड़ाईयां लड़ीं। उनका सबसे प्रसिद्ध युद्ध 1825 में गिरौदपुरी में हुआ था, जहां उन्होंने अंग्रेजों को हराया था। हालांकि, बाद में उन्हें अंग्रेजों ने पकड़ लिया और 10 दिसंबर 1825 में उन्हें जय स्तंभ चौक रायपुर में फांसी दे दी गई।
वीर की विरासत: वीर नारायण सिंह को छत्तीसगढ़ के पहले शहीद के रूप में सम्मानित किया जाता है। उनकी स्मृति में छत्तीसगढ़ सरकार ने कई संस्थानों और स्मारकों का निर्माण किया है। वीर नारायण सिंह की कहानी आज भी छत्तीसगढ़ के लोगों को प्रेरित करती है और उन्हें अपने देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए प्रेरित करती है।
कार्यक्रम के प्रभारी एवं अध्यक्ष अनिल दुबे की अगुवाई में दाऊ जी.पी.चंद्राकर, वेगेद्र सोनवेर, लालाराम वर्मा, महेंद्र कौशिक छन्नू साहू, विमल ताम्रकार, बृजबिहारी साहू, अशोक कश्यप, विशरु राम कुर्रे, श्यामूराम सेन, हेमसागर पटेल, नाथूराम सिंह, बोधन यादव, नाथुराम सिन्हा, जगदम्बिका साहू, भगत वर्मा, शुभकरण साहू, ठाकुरराम सिन्हा, चंद्र प्रकाश साहू, रामसिंग कंवर, गंगा प्रसाद कंवर, प्यारेलाल धीवर, बिशरू ध्रुव, श्रीमती मुनू बाई पटेल, राधाबाई सिन्हा, रितु महंत, टूकेश्वरी ध्रुव, धनेश्वरी यादव सहित सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने रैली रैली निकाली और संध्या 5:30 बजे जय स्तंभ चौक में दीप जलाकर वीर नारायण सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
मंच संचालन छसपा के संगठन सचिव एवं किसान मोर्चा के प्रवक्ता श्री जागेश्वर प्रसाद ने किया।
उक्त जानकारी अशोक कश्यप (कार्यालय सचिव) राज्य आंदोलनकारी संस्था/ छग संयुक्त किसान, छत्तीसगढ़ी भवन, ठाकुर प्यारेलाल सिंह मार्ग हांडीपारा रायपुर मो. 9407786350 ने दी!
Ghanshyam Prasad Sahu
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