January 03, 2025   gpsahu



बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार ओमप्रकाश साहू "अंकुर"

3 जनवरी 52वें जन्म दिवस पर विशेष...

राजनांदगांव जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ग्राम सुरगी। मान्यता है कि गांव का नाम सुरंग से सुरगी पड़ा।  यही सुरगी आज  साहित्य, कला, संगीत के लिए बहुत प्रसिद्ध है l यहां साकेत साहित्य भवन है  जहां जिले के साहित्यकार एवं अन्य जिले से साहित्यकार बैठ कर साहित्यिक चर्चा- परिचर्चा करते हैं l यहां साकेत साहित्य परिषद सुरगी गठित है। इस संस्था के वर्तमान अध्यक्ष है, ओमप्रकाश साहू अंकुर जी जिनके नेतृत्व में काव्य गोष्टी एवं परिचर्चा समय -समय पर होते रहता है l विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के कारण यह गांव हमेशा अखबार की सुर्खियों में बना रहता है l अपने निरंतर साहित्यिक गतिविधियों के कारण साहित्यकार  ओमप्रकाश साहू "अंकुर " जी जिला ही नहीं ही नहीं, अपितु प्रदेश स्तर पर अपनी एक पहचान बनाये हुए हैं l उनसे बात करके सामाजिक, साहित्यिक और दैनिक जीवन को एक छोटा सा परिचय का रूप देने का प्रयास किया है।

ओमप्रकाश अंकुर जी का जन्म राजनांदगांव जिले के ग्राम सुरगी में 3 जनवरी सन 19 73 को हुआ l पिता स्व. मेघुराम साहू, माता रजवंतीन साहू, पत्नी कौशल्या साहू । उनकी दो संतानें हैं पुत्र राहुल एवं पुत्री कुमारी अर्चना l अंकुर जी एक सामान्य कृषक परिवार में पले- बढ़े । प्राथमिक शिक्षा से लेकर हायर सेकेंडरी तक गांव की स्कूल में ही शिक्षा प्राप्त किया l स्कूली जीवन में ही निबंध लेखन, वाद- विवाद प्रतियोगिता, परिचर्चा, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता एवं काव्य पाठ में रुचि लेने लगे थे l सन 1997 में दिग्विजय कॉलेज के पढ़ाई के दौरान उनकी शादी हो गई और जीवन में गृहस्थी की जिम्मेदारी निभाते हुए कुछ प्राइवेट संस्थानों में काम किए। संघर्ष के दौर में उन्होंने शासकीय कृषि फार्म सुरगी में मजदूरी और गोदी- माटी का भी कार्य किया l वर्ष 1997 से 2003 तक जीवन के अपने संघर्ष के दौर में विभिन्न समस्याओं का सामना करते हुए जीवन यापन के लिए दैनिक नंदगांव टाइम्स के ऑफिस में भी कुछ महीने रात्रिकालीन ड्यूटी किए।

बता दें कि बता दे कि अंकुर जी सामाजिक क्षेत्र में हायर सेकेंडरी पढ़ाई के दौरान ही जुड़ गए और मंडल साहू संघ मुड़पार (सुरगी ) के सचिव रहे। वर्तमान में वे जिला साहू संघ राजनांदगांव के अंतर्गत साहित्य प्रकोष्ठ के जिला संयोजक हैं l शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन जिला इकाई राजनांदगांव के जिला संयोजक के रूप में अपने साथियों के साथ शिक्षकों की विभिन्न जायज मांगों के संबंध में आवाज उठाने में सक्रिय है l

उद्घोषक और मंच संचालन की भूमिका मे प्रशंसित हुए:

नौकरी लगने के पहले तक एक दशक तक विभिन्न धार्मिक प्रतियोगिताओं में सफल उद्भोषक का कार्य कर सैकड़ों मंच में सम्मानित हुए हैं। धार्मिक प्रतियोगिता में एक मंच संचालक के बतौर मानस मर्मज्ञ श्री हरभजन सिंह भाटिया, गौरी शंकर यादव, जस गीतकार श्री मनजीत मटियारा, दिलीप कुमार साहू "अमृत ", छोटू साहू सिंगोलिया जी एवं अन्य सुधी जनों ने उनका उत्साह बढ़ाया l पढ़ाई जीवन में चाचा श्रद्धेय लखन लाल दीपक, मिडिल स्कूल के हिंदी शिक्षक श्री कृष्ण कुमार तिवारी जी भरदाकला हाई स्कूल में श्री डी. आर. नावेलकर जी और दिग्विजय कॉलेज के हिंदी प्रोफेसर डॉ. नरेश कुमार वर्मा जी, डॉ. चंद्र कुमार जैन जी,  एन. एस. अधिकारी, डॉ. के एल टांडेकर जी, कमला कालेज के प्राचार्य डॉ. हेमलता महोबे जी, इतिहास के प्रोफेसर मेजर खड्ग बहादुर सिंह एवं अन्य शिक्षकों ने निबंध लेखन, साहित्य अभिरुचि, जनरल नॉलेज एवं वक्तृत्व कला के लिए खूब उत्साह बढ़ाया l


अंकुर ने मंचीय कवि के रूप में भी अपनी पहचान बनाया:

आंचलिक एवं राज्य  स्तरीय कवि सम्मेलन में विभिन्न कवियों विशंभर यादव "मरहा", गैंदलाल साहू "दीया", सीताराम साहू "श्याम", मीर अली "मीर", कुबेर सिंह साहू, आत्माराम कोशा "अमात्य", वीरेंद्र कुमार तिवारी, लखनलाल साहू लहर, छोटू साहू सिंघोलिया, शंतूराम गंजीर, प्यारेलाल देशमुख, अरविंद कुमार लाल, फागुदास कोसले, अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा, धर्मेंद्र पारख मीत, दिलीप कुमार साहू अमृत, नेतराम निषाद राज, मिथिलेश शर्मा, गजपति राम साहू, गजेंद्र हरिहानो दीप, त्रिलोक साहू बनिहार, पद्मलोचन शर्मा "मुंहफट" कौशल साहू लक्ष्य, नंद कुमार साहू साकेत, लतीफ खान, अशोक साहू आकाश, कामता प्रसाद सिन्हा, कृष्ण कुमार दीप, रमेश यादव, कैलाश साहू कुंवारा, पुष्कर सिंह राज, शेर सिंह गोड़िया, शिवकुमार अंगारे, गिरीश ठक्कर, दुर्गा प्रसाद श्याम कुंवर, दिनेश्वर प्रसाद चंद्राकर, टिकेश्वर सिन्हा गब्दीवाला, बूटू राम पुर्जे, पवन यादव पहुना, ऐनेंद्र शर्मा, दिनेश्वर प्रसाद साहू, शिव प्रसाद लहरे, ग्वाला प्रसाद यादव नटखट, रमेश कुमार मंडावी, भूखन वर्मा, अमृत दास साहू, किशोर मिश्रा, तजिंदर सिंह भाटिया, डॉक्टर इकबाल खान, वीरेंद्र अजनबी, शशि तिवारी, महुआ, माला गौतम, शैल शर्मा, राजकुमारी जैन, प्राची साहू, कोमल सिंह गुरु, नंद किशोर साव नीरव,  फकीर प्रसाद साहू फक्कड़, थनवार निषाद सचिन, रोशन लाल साहू, रामकुमार चंद्रवंशी, नंद कुमार साहू नादान, दिनेश कुमार कुरेटी दिलेर, पन्नालाल साहू, देवनारायण नगरिया, देव गुलाब जोशी, वेदराम पटेल, याददास साहू, रामखिलावन साहू, डोहर दास साहू सहित अन्य कवियों के साथ काव्य पाठ किया एवं कवि सम्मेलन में अनेक स्थानों में मंच संचालन का बखूबी दायित्व निभाया l

अंकुर जी का  शिक्षकीय जीवन:

6 अक्टूबर 2008 को शिक्षाकर्मी वर्ग 3 में नियुक्त अंकुर जी साहित्य के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी नवाचार गतिविधियों के कारण अपनी एक अलग पहचान बनाये हुए हैं l इस हेतु वे कोविड काल में सम्मानित होने के साथ ही वर्ष 2024 में रायपुर में राष्ट्रीय नवाचार शिक्षक रत्न सम्मान, 5 सितंबर 2024 को शिक्षक दिवस के अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ .रमन सिंह जी ने मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण के तहत विशिष्ट प्रतिभा सम्मान, शिक्षक के रूप में समाज की बहुमूल्य सेवा के लिए "शिक्षा दूत सम्मान 2024" से सम्मानित किए गए l आप वर्तमान में राजनादगांव जिले के ग्राम भोथीपार कला में अपनी शिक्षकीय कार्य कर रहे हैं l

 साहित्य के क्षेत्र में हुऐ अंकुर जी चर्चित:

साहित्य के क्षेत्र में नवाचार जैसे "पुरखा के सुरता", पत्र लेखन (चिट्ठी) संस्मरण लेखन के लिए छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रांतीय सम्मेलन में उनके काम की तारीफ  किया गया । अंकुर जी एक छंद साधक के रूप में छंदविद् अरुण  कुमार निगम जी, वरिष्ठ छंदकार महेंद्र कुमार बघेल जी, रामकुमार चंद्रवंशी जी, चोवा राम वर्मा बादल जी, जितेंद्र कुमार खैरझिटिया जी, बलराम चंद्राकर जी, ज्ञानु मानिकपुरी जी एवं अन्य वरिष्ठ  जनों के साथ जुड़ कर अपनी एक अलग छाप छोड़ने में सफल रहे है। "छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर" ग्रुप के माध्यम से गद्य (छत्तीसगढ़ी) में लगातार कलम चला रहे है। "छंद के छ गद्य खजाना" में उनकी तीन दर्जन के करीब गद्य रचना संरक्षित है।

इन सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं:

अंकुर जी को साकेत सम्मान 2008, चिन्हारी सम्मान भिलाई 2013, सामाजिक समरसता सम्मान धमतरी, सामाजिक प्रतिभा सम्मान राजनंदगांव, वक्ता मंच रायपुर द्वारा सर्वश्रेष्ठ कलमकार सम्मान, राष्ट्रीय कवि संगम रायपुर द्वारा सम्मान, आरूग चौरा परिवार द्वारा सम्मानित, लोक कला परंपरा भिलाई और छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग रायपुर द्वारा "मया चिन्हारी भेंट -2024" से सम्मानित हो चुके हैं l छत्तीसगढ़ के सभी प्रतिष्ठित अखबारों में उनकी कविताओं और गद्य का प्रकाशन हो चुका है l अंकुर जी की प्रथम कृति "जिंनगी ल सवार" 2008 में, उसके बाद 2024 में" पुरखा के सुरता (गद्य)" जिसका राजभाषा आयोग रायपुर में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी ने विमोचन किया l  

वर्तमान में  अंकुर जी साकेत साहित्य परिषद सुरगी राजनांदगांव के अध्यक्ष हैं और अपनी नेतृत्व क्षमता से सबको साथ लेकर साकेत साहित्य परिषद को साहित्यिक प्रगति के साथ नई ऊंचाई दे रहे हैं l साथ ही 28 फरवरी 2016 को गठित पुरवाही साहित्य समिति पाटेकोहरा छुरिया के संयोजक के बतौर वे वनांचल के साहित्यकारों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।


प्रस्तुति:पवन यादव "पहुना"

ग्राम- सुंदरा, जिला राजनांदगांव छग 93033 58271

Related Post

Advertisement



Trending News

संपादकीय

Get In Touch

Ghanshyam Prasad Sahu

+91-79872 78335

chhattisgarhsandeshnews@gmail.com

© Chhattisgarh Sandesh. All Rights Reserved. Developed by TechnoDeva